शिक्षण विधि की विभिन्न तकनीक

Different teaching techniques

किण्डर गार्टन प्रणाली (Kinder garten system)

किण्डर गार्टन प्रणाली के जन्मदाता जर्मन मनोवैज्ञानिक फ्रोबेल हैं। इसके अनुसार, विद्यालय बालकों का बगीचा है, जिसमें बालक स्वच्छन्दता के परिवेश में खेल सकें। इस प्रणाली के तहत बच्चों को खेल के माध्यम से सिखाया जाता है। इस प्रणाली के कई लाभ हैं; जैसे-शिशु शिक्षा पर बल, खेल द्वारा शिक्षा, बालकों की स्वतन्त्रता, सामाजिक भावना का विकसित होना, प्राकृतिक वातावरण के साथ अध्ययन इत्यादि।

प्रोजेक्ट या परियोजना विधि (Project or project method)

प्रोजेक्ट शिक्षा प्रणाली का जनक किल पैट्रिक को माना जाता है। इसके अन्तर्गत विभिन्न विधियों का प्रयोग होता है। अध्यापक वाद-विवाद के माध्यम से बालकों के समक्ष समस्या उत्पन्न करता है तथा उसके समाधान के लिए कहा जाता है कि वह प्रोजेक्ट के माध्यम से समस्या का समाधान करें। प्रोजेक्ट बालकों की इच्छा के अनुरूप दिया जाता है। प्रोजेक्ट की समाप्ति पर उसका मूल्यांकन होता है।

डाल्टन विधि (Dalton’s Law)

यह शिक्षा पद्धति 1920 ई. में कुमारी हेलेन पार्क हर्स्ट द्वारा विकसित की गई। अमेरिका के डाल्टन नगर में वह 30 बच्चों की प्रमुख थी, जो आयु तथा योग्यता में एक-दूसरे से अलग थे। इन बच्चों की शिक्षा के लिए जो विधि अपनाई गई उसे डाल्टन विधि कहा गया।

पेस्तालॉजी विधि (Pastology method)

इसके प्रणेता जॉन हेनरी पेस्तालॉजी थे। इन्होंने शिक्षा को मनोवैज्ञानिक रूप दिया तथा इनका बल शिक्षाशास्त्र पर था। अध्यापक को यह पता होना चाहिए कि बच्चे को कैसे पढ़ाना है, बच्चे किस आयु में सीखते हैं तथा बच्चे किस विधि से अधिक सीखते हैं? शिक्षण विधि के अन्य विधियों में व्याख्यान विधि, परिचर्चा विधि, निरूपण विधि तथा यूरिस्टिक विधि (अन्वेषण विधि) आती हैं।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *