सृजनात्मक बालकों की शिक्षा

Creative children education

सृजनात्मकता का शिक्षा के क्षेत्र में विशेष स्थान है। शिक्षा के द्वारा बालकों की सृजनात्मक शक्तियों का विकास किया जा सकता है जिसके द्वारा व्यक्ति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है। सृजनात्मकता के विकास के लिए बालकों की शिक्षा व्यवस्था किस प्रकार से की जानी चाहिए? यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है।

सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए मनोवैज्ञानिकों ने अनेक सुझाव दिए हैं जिनमें से कुछ प्रमुख सुझाव निम्नवत् हैं।

  • शाब्दिक परीक्षण में शब्दों में उत्तर देना होता है। कभी-कभी चित्र दिखाकर बालक से विभिन्न जानकारियाँ माँगी जाती हैं। इसके अलावा बालकों से पूछा जा सकता है कि जैसे क्या होगा यदि प्रत्येक हाथ में सिर्फ दो अंगुलियाँ हों?
  • इस प्रकार की स्थितियाँ देने से बालक विभिन्न प्रकार की कल्पनाएँ करता है। इन कल्पनाओं में जितना अधिक प्रवाह, विविधता, मौलिकता तथा विस्तरण होगा वह बालक उतना ही अधिक सृजनशील होगा।
  • बालकों में सृजनात्मकता का विकास करने के लिए यह आवश्यक है कि उनके अध्यापक भी सृजनात्मक प्रवृत्ति के हों दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अध्यापकगण साहित्य, विज्ञान, कला आदि विभिन्न क्षेत्रों में तरह-तरह के सृजनात्मक कार्य प्रस्तुत करके अपने बालकों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने में समर्थ होने चाहिए।
  • अध्यापक को विद्यालय में सृजनशील बालकों की पहचान करनी चाहिए ताकि उनकी योग्यता एवं क्षमता का सर्वांगीण विकास हो सके तथा इसका लाभ समाज को मिल सके।
  • अध्यापकों को स्वयं सृजनशील बालकों के लिए प्रेरणा स्रोत का कार्य करना चाहिए अर्थात् उच्च नैतिक स्तर, ईमानदारी, मानवता, समानता इत्यादि का गुण अध्यापकों में हो।
  • अध्यापकों को छात्रों को सृजनशील बनाने के लिए विषयवस्तु के अलावा निबन्ध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, नाटक प्रतियोगिता, खेल प्रतियोगिता इत्यादि का समय-समय पर आयोजन करना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों के महान् अन्वेषकों/खोजकर्ता के जीवन परिचय के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत जीवन में घटित विशेष तथा सार्थक घटनाओं के बारे में छात्रों को बताना चाहिए, जिससे कि उन्हें प्रेरणा मिले; जैसे-थॉमस आल्वा एडीसन, न्यूटन, डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, जगदीश चन्द्र बोस इत्यादि।

सृजनात्मक बालकों की विशेषताएँ (Characteristics of creative children)

 सृजनात्मक बालकों की विशेषताएँ निम्न हैं

  • मेकीनन के अनुसार सृजनशील बालकों की रुचि, अर्थों, प्रतीकों और उनमें निहित अर्थों में अधिक होती है।
  • इनमें उच्च सैद्धान्तिक एवं कलात्मक मूल्य होते हैं। सृजनशील बालक अधिक स्वतन्त्र होते हैं। सृजनशील बालक प्रभुत्वपूर्ण होते हैं। सृजनशील बालक आमूल परिवर्तनवादी, अन्तर्मुखी एवं आत्मनिर्भर होते हैं।
  • सृजनशील बालकों में मौलिकता का गुण पाया जाता है।
  • सृजनशील बालकों की बुद्धि लब्धि 120 से ऊपर होती है।
  • सृजनशील बालकों में अधिक तीव्र इच्छा शक्ति, आत्मनियन्त्रण, दूरदर्शिता के गुण पाए जाते हैं।
  • ऐसे बालक अपनी प्रतिष्ठा को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।

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