बच्चों की शिक्षण की रणनीतियाँ

Children teaching strategies

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के सिद्धान्तों का अध्ययन करने पर यह पता चलता है कि छात्रों को किसी विषय-वस्तु के विषय में कैसे सिखाया जाए। शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में छात्रों की उपस्थिति होना सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। अत: इन्हीं बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया को समझा जा सकता है, जो छात्रों एवं शिक्षकों दोनों के लिए उपयोगी होता है।

शिक्षण के क्षेत्र में 6 E5 एस एवं एक S (एस) मॉडल को अपनाया जाता है। जो बताना है कि एक शिक्षक अपने छात्रों को कक्षा में किस प्रकार से शिक्षण-प्रक्रिया को उपयोगी बना सकते हैं, साथ ही छात्रों को भी सीखने की प्रवृत्ति के विषय में उपयोग होता है, ये 6 ES एवं एक S (एस) हैं- संलग्न होना (Engage). अन्वेषण (Explore), व्याख्या (Explain), विस्तृत (Elaborate), मूल्यांकन (Evaluate), विस्तार (Extend) एवं मानक (Standard) इत्यादि। ये मॉडल विस्तृत एवं मानक हॉल ही में जोड़े गए हैं।

इन मॉडलों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैं

संलग्न (Attach)

इस प्रक्रम में छात्रों को सीखने के क्रम में उत्सुक बने रहना अनिवार्य होता है, शिक्षक को भी चाहिए कि वे छात्रों में किसी पाठ आदि के प्रति उत्सुकता उत्पन्न करते रहें। सारांशत: यह कहा जा सकता है कि उत्सुकता उद्दीपन की एक प्रक्रिया है, जो छात्रों के ज्ञान को बढ़ाता है तथा उन्हें विषय-वस्तु के साथ संलग्न रखता है।

अन्वेषण की क्षमता (Exploration capability)

अन्वेषण का अर्थ छात्रों द्वारा किसी विषय-वस्तु की गहराई का अवलोकन करना होता है। यह छात्रों में जागरूकता की भावना को उत्पन्न करता है, इस प्रक्रम में शिक्षक भी छात्रों को किसी विषय-वस्तु की गम्भीरता को बताते हैं, जो अन्तत: छात्रों द्वारा उस उपयुक्त विषय के बारे में अधिक-से-अधिक जानकारी प्राप्त कर ली जाती है।

समझना/व्याख्या (Understanding / Explanation)

शिक्षण प्रक्रम की यह वैसी अवस्था है, जिसके अन्तर्गत यह पता लगाया जाता है। कि छात्रों ने उक्त विषय के बारे में कितनी अधिक जानकारियाँ प्राप्त की हैं। इस प्रक्रिया में किसी विषय-वस्तु की तथ्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक आयामों की छात्रों से जानकारी ली जाती है।

विस्तृत (Extended)

ज्ञान के अनुप्रयोग का अर्थ अपनी बौद्धिक क्षमता का विकास करना होता है। इसके अन्तर्गत प्राप्त की गई. जानकारी को वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग करना होता है अर्थात् छात्र अपने ज्ञान की तथ्यात्मक, विश्लेषणात्मक एवं अन्य बिन्दुओं का प्रयोग करते हैं।

मूल्यांकन (Evaluation)

मूल्यांकन के प्रक्रम में शिक्षक एवं छात्र दोनों को शामिल किया जाता है, यह एक सतत् प्रक्रिया होती है, जिसमें समय-समय पर छात्रों का मूल्यांकन होता हैं

यह मूल्यांकन मुख्यत: दो प्रकार का होता है। प्रथम रचनात्मक मूल्यांकन एवं द्वितीय योगात्मक मूल्यांकन।

विस्तार (Detailed)

शिक्षण-अधिगम प्रक्रम में विस्तार का अर्थ अपने दिए गए पाठ्यक्रम के अलावा ज्ञान का प्राप्ति करना होता है। इस प्रक्रम में शिक्षक छात्रों को नए-नए तथ्यों से अवगत कराते रहते हैं।

मानक (Standard)

शैक्षणिक, संस्थानों के द्वारा निर्धारित मापदण्डों (Norms) को इस प्रक्रम के अन्तर्गत रखा जाता है। शैक्षणिक क्षेत्र के प्रमुख प्राधिकरण हैं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद्-एनसीइआरटी (NCERT) राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद् (NCTE), राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE), सीसीई मैन्युअल (CCE, Manual) सतत् और व्यापक मूल्यांकन (CCE), एवं राज्य बोर्ड (State Board) इत्यादि। ये मापदण्ड शिक्षक एवं छात्र दोनों के द्वारा अनुसरण किए जाते है, जो शैक्षणिक स्तर को गति प्रदान करते हैं।

 

सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)

  • शिक्षक व्यवहार में सुधार के लिए अपनाई जाने वाली प्रविधियों में से सूक्ष्म शिक्षण भी है। यह एक प्रशिक्षण प्रणाली है जिसका प्रयोग अध्यापकों को कक्षा अध्यापन प्रक्रियाओं की शिक्षा देने हेतु किया जाता है।
  • सूक्ष्म शिक्षण (Micro teaching) वास्तविक शिक्षण है, परन्तु इस प्रणाली में साधारण कक्षा अध्यापन की जटिलताओं को कम कर दिया जाता है तथा एक समय में किसी भी एक विशेष कार्य एवं कौशल के प्रशिक्षण पर ही जोर दिया जाता है। इसमें प्रतिपुष्टि द्वारा अभ्यास को नियन्त्रित किया जा सकता है।

डी. एलन की परिभाषा के अनुसार, “सूक्ष्म शिक्षण समस्त शिक्षण को लघु क्रियाओं में बाँटना है।”

सूक्ष्म शिक्षण चक्र को निम्नलिखित चित्र की सहायता से समझा जा सकता है

 

सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching)

 

शिक्षण कौशल (Teaching Skills)

सूक्ष्म शिक्षण का प्रयोग शिक्षण कौशलों के विकास के लिए किया जाता है। शिक्षण कौशलों से तात्पर्य उन शिक्षक व्यवहार एवं स्वरूपों से होता है, जो छात्रों में अपेक्षित व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रभावशाली होते हैं।

एन एल. गेज ने शिक्षण कौशल को इस तरह परिभाषित किया है, “शिक्षण कौशल वह विशिष्ट अनुदेशन प्रक्रिया है जिसे अध्यापक अपनी कक्षा-शिक्षण में प्रयोग करता है एवं जो शिक्षण-क्रम की उन क्रियाओं से सम्बन्धित होता है, जिन्हें शिक्षक अपनी कक्षा अन्त:क्रिया में लगातार उपयोग करता है।” अध्यापक अपने शिक्षण में अनेक प्रकार के कौशलों का उपयोग करता है।

इनमें से कुछ प्रमुख कौशल निम्न प्रकार हैं –

  • उद्दीपन                           – विन्यास प्रेरणा
  •  समीपता                        – मौन एवं अशाब्दिक

अन्त:प्रक्रिया

  • पुनर्बलन                            – प्रश्न पूछना
  • खोजपूर्ण प्रश्न                    – विकेन्द्री प्रश्न
  • छात्र व्यवहार का ज्ञान         – दृष्टान्त देना
  • व्याख्यान                        – उच्चस्तरीय प्रश्न करना
  • नियोजित पुनरावृत्ति एवं सम्प्रेषण।

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