समस्या समाधान के प्रति बालको का दृष्टिकोण

Children attitude towards problem solving

विद्यालय में बालक अपने समक्ष अनेक समस्याओं का सामना करता है तथा उन समस्याओं का समाधान भी उसे स्वयं ही करना पड़ता है। इस सम्बन्ध में बालक एक समस्या-समाधक के रूप में भूमिका का निर्वाह करता है। शिक्षक का यह दायित्व है कि वह बालक का उस स्तर तक विकास करने में सहायक हो, जिससे कि बालक अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके तथा सभी प्रकार की परिस्थितियों में अपने आप को ढाल सके। एक समस्या समाधक के रूप में बालक अपनी समस्याओं का वैज्ञानिक ढंग से हल खोजने का प्रयत्न करता है।

कुछ समस्याएँ निम्नवत् हैं

  • सर्वप्रथम बालक को समस्या का चयन करना पड़ता है कि उसकी वास्तविक समस्या क्या है?
  • बालक को समस्या के चयन के बाद उसके कारण का पता लगाना होता है कि समस्या का कारण क्या है?
  • समस्या के कारणों का पता लगाने के बाद बालक समस्या समाधान के लिए कार्य करता है तथा उसका हल खोजने का प्रयत्न करता है कि समस्या का सही हल क्या है?
  • यह हल प्रमाणित और परिलक्षित तथ्यों पर आधारित है भी या नहीं इसका पता लगाना होता है।

बालक से यह आशा की जाती है कि वह समस्या समाधान का प्रयोग अपने व्यक्तिगत जीवन में भली-भाँति करे।

समस्या समाधान के विभिन्न आयाम (Different dimensions of problem resolution)

बालक किसी समस्या का आसानी से समाधान कर सके, इसके लिए उसमें कुछ गुणों का विकास आवश्यक होता है जो निम्नवत् हैं

बालके में आत्म पहचान का गुण विकसित करके (By developing the quality of self-identification in the ballet)

इसके लिए बच्चों को ऐसे काम दिए जाने चाहिए, जिनमें सफलता निश्चित हो। इन कामों को करने से बालक में . आत्मविश्वास बढ़ता है, जो जीवन में प्रसन्नता व सहयोग की भावना को बढ़ाता है। समय-समय पर बालक के काम की प्रशंसा करनी चाहिए तथा छोटी-छोटी बातों पर उन्हें पुरस्कृत करना चाहिए जिससे कि वह भविष्य में अपनी समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकें।

बालक को स्वावलम्बी बनाने के लिए प्रोत्साहित करके (By encouraging the child to be self-reliant)

बालक को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। इसके लिए बालक को कहानियाँ सुनानी चाहिए, नाटक दिखाने चाहिए। बालकों को चुनौतीपूर्ण व उत्तरदायित्व वाले काम सौंपने चाहिए, जिससे  कि वह समस्याओं के समाधानों का हल सही दिशा में निकालने के लिए सक्षम हो सकें।

बालक में भाषा का विकास करके (By developing language in the child)

बालकों में भाषा का विकास करके एक शिक्षक उसे समस्याओं को सुलझाने में सक्षम बना सकता है। यदि बालक में भाषा कौशल होगा, तो वह अपनी समस्याओं को हल करने के लिए  कोई-न-कोई मार्ग अवश्य निकाल लेगा।

बालक को बार-बार प्रयास कराके (By making repeated attempts to the child)

बालक को यदि छोटी-छोटी समस्याओं को स्वयं हल करने के लिए बार-बार प्रेरित किया जाए, तो एक दिन वह अपनी समस्याएँ स्वयं हल करने लगता है। यह विधि बालकों के समस्या समाधान के लिए सबसे उपयुक्त विधि मानी गई

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