बाल केन्द्रित शिक्षा

बाल-केन्द्रित शिक्षा एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा (Concept of Child Centered and Progressive Education)

बाल-केन्द्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा दोनों आधुनिक युग की माँगें हैं। बाल-केन्द्रित शिक्षा के सन्दर्भ में कहा जाता है कि शिक्षा का केन्द्र-बिन्द बालक होता है इसमें बालकों की रुचियों, प्रवृत्तियों एवं उनकी क्षमताओं को ध्यान में रखकर शिक्षा दी जाती है। वहीं प्रगतिशील शिक्षा जॉन डी.वी. की विचारधारा पर आधारित है, इनके अनुसार, शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य बालकों का सर्वांगीण विकास करना है। शिक्षा की सार्वभौमिक पहँच के लिए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार के सहयोग से कई योजनाओं को अस्तित्व में लाया गया है।

बाल-केन्द्रित शिक्षा (Child centered education)

बाल केन्द्रित शिक्षा में शिक्षा का केन्द्र-बिन्दु बालक होता है। इसके अन्तर्गत बालक की रुचियों, प्रवृत्तियों तथा क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रदान की जाती है। बाल-केन्द्रित शिक्षा में व्यक्तिगत शिक्षण को महत्त्व दिया जाता है। इसमें स्वाभाविक रूप से विकसित अनुशासन स्थापित होता है। इसमें बालक का व्यक्तिगत निरीक्षण कर उसकी दैनिक कठिनाइयों को दूर करने की कोशिश की जाती है। बालक को स्वावलम्बी बनाकर उसमें स्वतन्त्रता की भावना पैदा की जाती है। बालक चुने हुए साधनों में से अपनी इच्छानुसार किसी भी साधन का चुनाव कर सकता है। बाल-केन्द्रित शिक्षा जीवन की शिक्षण प्रणाली है। अत: एक विकसित शिशु से एक विकसित प्रौढ़ बनाने के लिए जो कार्य किया जाता है, उन सभी क्रिया प्रणालियों का समावेश इस शिक्षा में किया गया है। बाल-केन्द्रित शिक्षा पूर्णतः मनोवैज्ञानिक है।

 

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