अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ

Characteristics of good evaluation

एक अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ निम्नवत् हैं

वैधता (Validity)

वैध मूल्यांकन वह होता है, जो वास्तव में उसी बात का परीक्षण करे जिसके बारे में वह जानना चाहता है, अर्थात् उद्देश्य में वर्णित जो व्यवहार हम जाँचना चाहते हैं केवल उसी की जाँच की जाए। स्पष्टत: कोई व्यक्ति जानबूझकर ऐसे मूल्यांकन प्रश्न नहीं बनाएगा जो निरर्थक बातों को जाँचें। वास्तविकता यह है कि अधिकतर शिक्षक ऐसे बिन्दुओं को जाँचते हैं, जो प्रामाणिक नहीं होते।

विश्वसनीयता(Reliability)

विभिन्न परन्तु समतुल्य परिस्थितियों में किसी प्रश्न, परीक्षण या परीक्षा का उत्तर पूर्णतः एक ही प्रकार का होगा तो ऐसा मापन विश्वसनीयता कहलाएगा। विश्वसनीय सामग्री वही है जिसमें एक-से स्तर के विद्यार्थी पुन: परीक्षा में लगभग एक-सा ही उत्तर देते हैं।

व्यावहारिकता(Practicality)

मूल्यांकन की प्रक्रिया, लागत, समय और प्रयोग-सरलता की दृष्टि से वास्तविक, व्यावहारिक और कुशल होनी चाहिए। हो सकता है कि मूल्यांकन का कोई तरीका आदर्श हो, परन्तु उसे व्यवहार में न लाया जा सके। यह ठीक नहीं है, इसको प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

न्यायसंगतता(Justness)

मूल्यांकन सभी विद्यार्थियों के लिए समान रूप से न्यायसंगत होना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब किसी पाठ के उद्देश्यों के अनुरूप विद्यार्थियों के अपेक्षित व्यवहारों को दर्शाएँ। अत: यह भी अपेक्षित है कि विद्यार्थी को पता हो कि उनका मूल्यांकन कैसे होना है?

उपयोगिता(Utility)

मूल्यांकन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होना चाहिए। इसके परिणामों से विद्यार्थी को अवगत होना चाहिए ताकि वह अपनी कमजोरियों को और जिन बातों (बिन्दुओं) में उसे महारत है, उनको जान सके। इस प्रकार वह अधिक सुधार लाने की सोच सकता है।

मूल्यांकन का प्रयोजन(Purpose of evaluation)

मूल्यांकन के कुछ प्रमुख प्रयोजन निम्नलिखित हैं 

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि अध्ययन के विभिन्न विषयो में बीते समय में बच्चे के अन्दर क्या अधिगम परिवर्तन और प्रगति हुई है?
  • यह पता लगाना कि प्रत्येक छात्र की आवश्यकताएँ और अधिगम शैली क्या है?
  • एक अध्यापन-अधिगम योजना संकल्पित करना जो वैयक्तिक जरूरतों और अधिगम शैलियों के लिए प्रतिक्रियाशील हो।
  • मूल्यवर्धन द्वारा अध्यापन-अधिगम सामग्रियों को सुधारना।
  • प्रत्येक छात्र को अपनी रुचियों, मनोवृत्तियों, क्षमताओं और कमियों के बारे में पता लगाने में सहायता करना ताकि छात्र प्रभावी अधिगम कार्यनीतियाँ विकसित कर सकें।
  • पाठ्यक्रम के उद्देश्यों को पाने की सीमा का मापन करना।
  • अध्यापन-अधिगम प्रक्रिया की प्रभावशीलता को बढ़ाना।
  • प्रत्येक छात्र की प्रगति को अभिलेखित करना और माता-पिता तथा अन्य हितधारकों को इसका सम्प्रेषण करना।
  • अध्यापक और छात्र के बीच वार्तालाप कायम रखना और साथ ही माता-पिता को प्रणाली के समग्र सुधार के लिए एक संयोगात्मक प्रयास के रूप में जोड़े रखना।
  • अभिजात और स्वयं मूल्यांकन के जरिए प्रक्रिया में छात्रों को शामिल करना।

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