भक्त फूल सिंह

भक्त फूल सिंह जी का जन्म 24 फरवरी, 1885 को वर्तमान सोनीपत जिले के गोहामा उपमण्डल के माहरा गाँव में एक मलिक गोत्रीय किसान परिवार में हुआ था। 1904 ई. में वह पानीपत जिले में पटवारी के रूप में नियुक्त हो गए। 1909 ई. में भक्त जी पानीपत जिले के उरलाना गाँव में आ गए। उस समय इनका नाम हरफूल सिंह था। उस समय तक इनका जीवन एक सामान्य मनुष्य की तरह तमाम राग-रंग से परिपूर्ण था। एक दिन उन्होंने प्रख्यात आर्य समाजी संत स्वामी श्रद्धानंद जी का प्रवचन सुना और स्वामी जी की प्रेरणा से इनका जीवन ही बदल गया। उन्होंने स्वामी जी को ही अपना प्रेरणा स्रोत बना लिया। 1916 ई. में हरफूल सिंह ने पटवारी की नौकरी भी त्याग दी तथा माहरा गाँव में अपनी 100 बीघा जमीन का दान कर दिया। तभी से उन्हें भक्त फूल सिंह कहा जाने लगा।

वह भैंसवाल कलां गाँव के निकट के जंगल में आ गए तथा 1919 ई. में यहाँ पर लड़कों की शिक्षा के लिए एक गुरुकुल की स्थापना की। इस गुरुकुल का शिलान्यास स्वयं स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा किया गया था। यह गुरुकुल वर्तमान में भक्त फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय का दक्षिणी परिसर है। भक्त जी की महिलाओं की शिक्षा में विशेष रुचि थी। कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1936 ई. में भक्त फूल सिंह जी ने गोहाना के निकट खानपुर कलां गाँव में आर्य कन्या गुरुकुल की स्थापना की। 1938-39 ई. में उन्होंने आर्य समाज के प्रतिनिधि के रूप में हैदराबाद सत्याग्रह में भाग लिया।

भक्त फूल सिंह जी द्वारा खानपुर में कन्या गुरुकुल के रूप में लगाया गया यह पौधा नवंबर 2006 ई. में उत्तर-भारत के प्रथम महिला विश्वविद्यालय के रूप में वटवृक्ष बनकर उभरा। 2006 में हरियाणा सरकार ने यहाँ भक्त फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय तथा महिला चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना करके इन दिव्यात्मा के स्वप्न को साकार किया। भक्त फूल सिंह जी अपने सुधार कार्यक्रमों में कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने और कुरीतियों पर प्रहार के कारण कट्टरवादी तत्वों को खटकने लगे थे। 14 अगस्त, 1942 को कुछ धर्मांध रांघड़ों ने उनकी हत्या कर दी।

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