शिक्षण की मूल प्रक्रिया

Basic teaching process

शिक्षण एवं अधिगम दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। शिक्षण एवं विकास की प्रक्रिया में अध्यापक की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है इस सन्दर्भ में थॉर्नडाइक ने सीखने से सम्बन्धित कुछ नियम; जैसे- तत्परता, अभ्यास तथा प्रभाव का नियम दिया जो, इस प्रक्रिया में मील का पत्थर’ साबित हुआ। शिक्षण प्रक्रिया के कुछ महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त, जैसे निश्चित उद्देश्य, परस्पर सम्बन्ध, पुनर्बलन एवं अभिप्रेरणा से सम्बन्धित दर्शन मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित किए गए।

शिक्षण का अर्थ है सीखने में सहायता करना, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के प्रयासों तथा अनुभवों के आधार पर सीखता है। शिक्षक अपने छात्र को सीखने में प्रेरणा दे सकता है, रुचि उत्पन्न कर सकता है, लेकिन वह स्वयं छात्र से कुछ नहीं सीखता। शिक्षण का शिक्षा से घनिष्ठ सम्बन्ध है। प्राचीन काल से ही गुरु-शिष्य परम्परा रही है जिसमें गुरु, प्यार एवं स्नेह से अपने शिष्यों को आरम्भ में पढ़ाता था। जैसे-जैसे समाज बदलता रहा शिक्षा का अर्थ भी बदलता रहा। अतः शिक्षण की कोई एक परिभाषा नहीं दी जा सकती, क्योंकि शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है। साथ ही, शिक्षण की प्रक्रिया अधिगम के बिना पूरी नहीं होती, अर्थात् शिक्षण और अधिगम में गहरा सम्बन्ध होता है।

शिक्षण की कुछ प्रमुख परिभाषाएँ इस प्रकार हैं

स्मिथ के अनुसार, “शिक्षण, उद्देश्य-केन्द्रित क्रिया है।”

मोरीसन के अनुसार, “शिक्षण एक परिपक्व व्यक्ति व कम परिपक्व व्यक्ति के बीच घनिष्ठ सम्बन्ध है जिसमें अधिक परिपक्व व्यक्ति कम परिपक्व व्यक्ति को शिक्षित करता है।”

बर्टन के अनुसार, “शिक्षण, अधिगम हेतु प्रेरणा, पथ-प्रदर्शन व प्रोत्साहन है।”

थाइन के अनुसार, “अधिगम में वृद्धि करना ही शिक्षण है।”

हफ तथा डंकन के अनुसार, “शिक्षण चार चरणों वाली एक प्रक्रिया है। योजना, निर्देशन, मापन तथा मूल्यांकन।”

शिक्षण की प्रकृति एवं विशेषताएँ (Nature and characteristics of teaching)

शिक्षण की प्रकृति एवं विशेषताएँ प्रमुख रूप से निम्नांकित है। 

  •  शिक्षण एक सामाजिक प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक विकास की प्रक्रिया है।
  • शिक्षण आमने-सामने होने वाली प्रक्रिया है।
  • शिक्षण कला और विज्ञान दोनों है।
  • शिक्षण एक भाषायी प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक अन्तःक्रिया है।
  • शिक्षण एक उपचार विधि है।
  • शिक्षण एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक त्रिध्रुवी प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक निर्देशन की प्रक्रिया है।
  • शिक्षण औपचारिक व अनौपचारिक प्रक्रिया है।
  • शिक्षण एक कौशलपूर्ण प्रक्रिया है।

शिक्षा तथा विद्यालयीय शिक्षा, अधिगम, प्रशिक्षण, शिक्षण तथा अनुदेशन में भेद (Distinction between education and school education, learning, training, teaching and instruction)

सामान्यत: लोग शिक्षा की अवधारणा को स्कूलन, अधिगम, अध्यापन अथवा अनुदेशन के रूप में समझने की भूल कर बैठते हैं। यद्यपि इन शब्दों तथा शिक्षा की प्रक्रिया के मध्य गहरा सम्बन्ध है, तथापि इन सभी के अर्थों में भिन्नता है।

शिक्षा (Education)

व्यापक अर्थ में शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है, जो जीवनभर चलती रहती है। इस प्रक्रिया के अन्तर्गत ज्ञान, अनुभव, कौशल तथा अभिवृत्तियाँ (Attitudes) सभी आते हैं। इस प्रकार जीवन के सभी अनुभव सम्भवत: शैक्षिक बन जाते हैं तथा शिक्षा की प्रक्रिया वैयक्तिक तथा सामाजिक दोनों प्रकार की अवस्थाओं में चलती रहती है। शिक्षा के इस अर्थ में उन सभी मूल्यों, अभिवृत्तियों तथा कोशलों, जिन्हें समाज बच्चों में डालना चाहता है, को विकसित करने सम्बन्धी सभी प्रयत्न सम्मिलित हैं।

अध्ययन (Study)

स्कूलन वह क्रिया है, जिसमें चेतन रूप में मूल्य, ज्ञान तथा कौशलों को बच्चों में एक औपचारिक स्थिति की रूपरेखा के अन्तर्गत प्रदान करने का प्रयत्न किया जाता है। विद्यालयों द्वारा कुछ ऐसे विशेष विषय क्षेत्रों में सुविचारित व क्रमबद्ध प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जो अन्य लोगों की जीवन प्रक्रिया या अनुभवों द्वारा प्राप्त न किया जा सके। इस तरह स्कूलन एक ऐसा शैक्षिक कार्य है, जिसमें दिए जाने वाले अनुभवों की एक निश्चित सीमा है तथा जो मानव जीवन की एक विशिष्ट अवधि तक सीमित है। स्कूलन हमारी शिक्षा का एक अंग मात्र है।

अधिगम (Learning)

अधिगम (Learning) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा अभ्यास अथवा अनुभव के आधार पर व्यवहार में परिवर्तन सम्भव होता है। शारीरिक परिवर्तन को अधिगम के अन्तर्गत शामिल नहीं किया जाता। शिक्षा के द्वारा अधिगम प्रक्रियाओं को सुसंगत व्यक्तित्व विकास जैसे अपने व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

प्रशिक्षण (Training)

प्रशिक्षण ऐसी क्रियाओं की एक क्रमबद्ध श्रृंखला है, जिसमें अनुदेशन, अभ्यास आदि सम्मिलित होते हैं तथा जिनका उद्देश्य जीवन अथवा व्यवसाय के किसी विशेष पक्ष से सम्बन्धित वांछनीय आदतों को उत्पन्न करना या व्यवहार-प्रकट करना होता है। उदाहरण के लिए, शिक्षण में निपुण होने के लिए व्यक्ति अध्यापक प्रशिक्षण का सहारा लेता है, जबकि तकनीकी कौशलों के विकास के लिए वह तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करता है। प्रशिक्षण के द्वारा विशिष्ट कौशलों का विकास तथा संवर्धन होता है, ताकि प्रशिक्षण पाने वाले को सम्बन्धित क्षेत्र अथवा कार्य में विशेषज्ञ बनाया जा सके।

शिक्षण तथा अनुदेशन (Teaching and instruction)

यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिनका उपयोग मानव व्यवहार में अभीष्ट परिवर्तन लाने के लिए किया जाता है। शिक्षण तथा अनुदेशन में अध्येता को विचारों, मूल्यों, कौशलों, सूचनाओं तथा ज्ञान का सम्प्रेषण कराना सम्मिलित होता है। अध्ययन तथा अनुदेशन का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षित करने की दृष्टि से उनके अधिगम को प्रभावी बनाना होता है।

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