बाबा बन्दा बहादुर

बाबा बन्दा बहादुर एक महान योद्धा थे। उनके जन्म स्थान तथा आरंभिक जीवन के विषय में कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं मिलती। उन्होंने नांदेड़ में गुरु गोविन्द सिंह जी से भेंट की। गुरुजी से प्रेरणा पाकर बाबा जी उत्तर भारत में गए तथा वर्तमान सोनीपत जिले में खरखोदा के निकट सेहरीखाण्डा गाँव को अपना मुख्यालय बना लिया। उनके आह्वान पर लगभग 5 हजार घडसवार तथा 8,000 पैदल सैनिक उनके साथ गए। उन्होंने सोनीपत, कैथल, शाहबाद पर अधिकार कर लिया तथा कुंजपुरा के फौजदार वजीर खां को मार डाला। इसके पश्चात् बंदा बहादुर ने सरहिंद पर अधिकार करके यहां अपना मुख्यालय बना लिया। 26 अक्तूबर, 1710 को करनाल तथा इन्द्री के बीच बंदा बहादुर की सेनाओं को बहादुरशाह के मेवाती सरदार फिरोज खाँ ने करारी शिकस्त दी। जब सरहिंद में भी स्थिति नियंत्रण में नहीं रही तो बन्दा बहादुर ने वर्तमान यमुनानगर जिले मे सढौरा के निकट लोहगढ़ के किले को अपना ठिकाना बना लिया। अक्तूबर, 1713 में शाही सेना के आक्रमणों के कारण बन्दा बहादुर को यह ठिकाना भी छोडना पड़ा। कुछ समय उपरान्त मुगलों ने उन्हें बंदी बनाकर कत्ल करवा दिया।

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