वातावरण का प्रभाव

Atmosphere effect

पाश्चात्य मनोवैज्ञानिकों ने वातावरण के महत्त्व के सम्बन्ध में अनेक अध्ययन और परीक्षण किए हैं। इनके आधार पर उन्होंने सिद्ध किया है कि बालक के व्यक्तित्व के प्रत्येक पहलू पर भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। यहाँ कुछ मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रभाव का वर्णन कर रहे हैं |

वातावरण का शारीरिक अन्तर पर प्रभाव(Effect of environment on physical difference)

फ्रेंज बोन्स का मत है कि विभिन्न प्रजातियों के शारीरिक अन्तर का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है। उसने अनेक उदाहरण देकर सिद्ध किया है कि जो जापानी और यहूदी, अमेरिका में अनेक पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, उनकी लम्बाई भौगोलिक वातावरण के कारण बढ़ गई है।

वातावरण का मानसिक विकास पर प्रभाव(Effect of environment on mental development)

गोर्डन का मत है कि उचित सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण न मिलने पर मानसिक विकास की गति धीमी हो जाती है। उन्होंने यह मत नदियों के किनारे रहने वाले बच्चों का अध्ययन करके सिद्ध किया। इन बच्चों का वातावरण दूषित और समाज के अच्छे प्रभावों से दूर था।

वातावरण का प्रजाति की श्रेष्ठता पर प्रभाव(Effect of environment on species superiority)

क्लार्क का कहना है कि कुछ प्रजातियों की बौद्धिक श्रेष्ठता का कारण वंशानुक्रम न होकर वातावरण है। उन्होंने यह मत अमेरिका के कुछ गोरे और नीग्रो लोगों की बुद्धि-परीक्षा लेकर सिद्ध किया। उनके समान अनेक अन्य विद्वानों का मत है कि नीग्रो प्रजाति की बुद्धि का स्तर इसलिए निम्न है, क्योंकि उनको अमेरिका की श्वेत प्रजाति के समान शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण उपलब्ध नहीं है।

वातावरण का बुद्धि पर प्रभाव (Effect of environment on intelligence)

कैन्डोल का मत है कि बुद्धि के विकास में वंशानुक्रम की अपेक्षा वातावरण का प्रभाव कहीं अधिक पड़ता है। उन्होंने इसे 552 विद्वानों का बौद्धिक अध्ययन करके सिद्ध किया। ये विद्वान् लन्दन की ‘रॉयल सोसायटी’, पेरिस की ‘विज्ञान अकादमी’ और बर्लिन की ‘रॉयल अकादमी’ के सदस्य थे।

इन सदस्यों को प्राप्त होने वाले वातावरण के सम्बन्ध में कैन्डोल ने लिखा है “अधिकांश सदस्य धनी और अवकाश प्राप्त वर्गों के थे। उनको शिक्षा की सुविधाएँ थीं और उनको शिक्षित जनता एवं उदार सरकार से प्रर्याप्त प्रोत्साहन भी मिला था।”

वातावरण का व्यक्तित्व पर प्रभाव(Effect of environment on personality)

कूले का मत है कि व्यक्तित्व के निर्माण में वंशानुक्रम की अपेक्षा वातावरण का अधिक प्रभाव पड़ता है। कूले ने सिद्ध किया है कि कोई भी व्यक्ति उपयुक्त वातावरण में रहकर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करके महान बन सकता है।

वातावरण का बालक पर बहुमुखी प्रभाव(Multifaceted effect of atmospheric environment on the child)

वातावरण, बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक आदि सभी अंगों पर प्रभाव डालता है। इसकी पुष्टि ‘एवेरॉन के जंगली बालक’ के उदाहरण से की जा सकती है। इस बालक को जन्म के बाद ही भेड़िया उठा ले गया था और उसका पालन-पोषण जंगली पशुओं के बीच में हुआ था।

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