अंबाला शहर

Ambala City

अंबाला जिला हरियाणा के उत्तरी भाग में स्थित है। इसके उत्तर में पंचकूला, उत्तर-पूर्व में हिमाचल प्रदेश, पूर्व में यमुनानगर, दक्षिण में कुरुक्षेत्र तथा पश्चिम में पंजाब के पटियाला जिलों की सीमाएँ लगती हैं। अंबाला जिले का कुल क्षेत्रफल 1,569 वर्ग किमी है।

अंबाला की स्थापना एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Ambala’s Establishment and Historical Background)

अंबाला नगर की स्थापना चौदहवीं शताब्दी में अंबा राजपूत द्वारा की गई थी। एक धारणा के अनुसार शहर का नाम अंबाला इसीलिए पड़ा क्योंकि इसके संस्थापक अंबा राजपूत थे। एक – अन्य धारणा है कि शहर का नाम माता अंबा (भवानी) के नाम पर अंबाला पड़ा। माँ अंबा का एक प्राचीन मंदिर आज भी नगर में विद्यमान है। साम्यवादी इतिहासकार मानते हैं कि इस क्षेत्र में आम की अत्यधिक पैदावार होने के कारण इस नगर का नाम अंबवाला पड़ा जो बाद में बिगड़ कर अंबाला हो गया। इसमें से पहली अवधारणा ही सबसे सटीक जान पड़ती है। कुछ लोग इसकी उत्पत्ति महाभारत काल में ‘अम्बालिका’ के नाम से भी मानते हैं।

Ambala city map Haryana

हिमालय से आकर सरस्वती नदी के काँठों को आर्यों ने अपना निवास स्थान बनाया। धीरे-धीरे आर्यों ने अंबाला को अपना स्थायी ठिकाना बना लिया। अंबाला का निकटवर्ती स्थान सरधना मध्य काल में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था। किसी समय इस देश की राजधानी रहा. भी बताया जाता है। मुगल काल में बादशाह अकबर के समय अंबाला दिल्ली सूबे की सरहिन्द सरकार (जिला) का एक परगना था। 1763 ई. में जब सिख शासक संगतसिंह ने अंबाला रियासत की स्थापना की तो अंबाला इस रियासत का मुख्यालय बन गया। अंबाला रियासत के संस्थापक सरदार संगतसिंह (1763-68 ई.) के अलावा सरदार ध्यानसिंह (1768-74 ई.) गुरबख्शसिंह (1774-83 ई.), रानी दया कौर (1783-1808 ई.) रणजीत सिंह (1808-09 ई.) तथा पुनः रानी दया कौर (1809-1823 ई.) इस रियासत के प्रमुख शासक रहे। 1823 ई. में सतलुज नदी के पास के राज्यों के लिए राजनीतिक एजेंट का मुख्यालय बनाकर अंग्रेजों ने अंबाला पर अधिकार कर लिया।

  • अंग्रेजों का अधिकार हो जाने के उपरान्त 1842 ई. में अंबाला को शिमला के अधीन कर दिया गया था। इसके अगले वर्ष अर्थात् 1843 में अंग्रेजों ने करनाल छावनी को अंबाला में स्थानान्तरित करके अंबाला छावनी की स्थापना की।
  • 1860 ई. में लार्ड कैनिंग (तत्कालीन वॉयसराय) ने यहाँ दरबार लगाया। 1860 में ही यहाँ डाक की सुविधा शुरू हुई थी। 1880 में अंबाला को रेलवे लाइन से जोड़ दिया गया। वर्तमान में अंबाला कैंट जंक्शन उत्तरी हरियाणा का सबसे बड़ा जंक्शन है। यहां पर उत्तर रेलवे जोन का संभागीय मुख्यालय भी है।
  • 1847 ई. में अंबाला को जिले का दर्जा दिया गया। 1859 ई. में अंबाला शहर को जिला मुख्यालय बना दिया गया। उस समय अंबाला जिले में 6 तहसील-अंबाला, जगाधरी, रोपड़, खरड़, नारायणगढ़ और नालागढ़ थी। वर्तमान में नालागढ़ का हिमाचल में विलय किया जा चुका है। अंबाला जिले के गाँव लखनौर साहिब (प्राचीन नाम लखनौती, लखनावती) में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी की माता का जन्म स्थान है। गुरु गोविंद सिंह जी का ननिहाल होने के कारण लखनौर साहिब सिखों का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।
  • अंबाला 1857 के विद्रोह का प्रमुख केंद्र था। 1857 में अंबाला छावनी के हिन्दुस्तानी सैनिकों ने 10 मई, 1857 को ही विद्रोह का झंडा बुलंद कर दिया था।
  • आजादी के आंदोलन में भी अंबाला का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी राय बहादुर मुरलीधर का संबंध अंबाला से ही था। राय बहादर मुरलीधर ने असहयोग आंदोलन के दौरान अपनी राय बहादुर’ की उपाधि लौटा दी और आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया। 8 नवम्बर, 1927 को गठित साइमन कमीशन का भी अंबाला की जनता ने जम कर विरोध किया।

अंबाला का महत्वपूर्ण कस्बा (Important town of Ambala)

नारायणगढ़ नारायणगढ को वर्तमान हिमाचल प्रदेश की तत्कालीन रियासत सिरमौर के राजा लक्ष्मी नारायण ने बसाया था। मुगलों के पतन के उपरान्त सिरमौर के राजा ने कुलसन में एक किला बनवाया और इसका नाम नारायणगढ़ रखा। इस कारण इस कस्बे का नाम नारायणगढ़ हो गया। 1766 ई. में इस कस्बे पर अहमदशाह अब्दाली का कब्जा हो गया।

अंबाला का प्रशासनिक परिदृश्य (Ambala’s Administrative Scenario)

सन् 1959 में पंजाब सरकार द्वारा अंबाला को जिला एवं मंडल मुख्यालय बना दिया गया। 1 नवम्बर, 1966 को हरियाणा गठन के समय बने सात जिलों में से अंबाला भी एक था। 1 नवम्बर, 1989 को अंबाला जिले से जगाधरी उपमंडल को अलग कर दिया गया और यमुनानगर जिला आस्तित्व में आया। प्रशासनिक दृष्टि से वर्तमान में अंबाला जिले में 4 उप-मंडल, 4 तहसील, 3 उप-तहसील तथा 6 खंड हैं।

अंबाला शहर अंबाला मंडल का मुख्यालय भी है जिसमें चार जिले-अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र सम्मिलित हैं। अंबाला शहर में पुलिस और प्रशासन की दृष्टि से ‘कमिश्नरी व्यवस्था’ स्थापित की गई थी, परन्तु अब इसे समाप्त कर दिया गया है। अंबाला में अंबाला पुलिस रेंज का मुख्यालय भी है। इस रेंज में अंबाला, यमुनानगर तथा कुरुक्षेत्र जिले भी शामिल हैं।

स्थानीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए अंबाला नगर निगम बनाया गया है। अंबाला जिले में कुल 481 गांव हैं जिनमे 491 ग्राम पंचायत हैं। जिले में कुल 6 पंचायत समिति तथा 15 जिला परिषद् वार्ड हैं। संसदीय लोकतंत्र की दृष्टि से अंबाला जिला अंबाला संसदीय क्षेत्र (सुरक्षित) का भाग है। अंबाला जिले में चार विधानसभा क्षेत्र-अंबाला कैंट, अंबाला शहर, नारायण गढ़ तथा मुलाना (सुरक्षित) हैं।

अंबाला का भौगोलिक परिदृश्य (Geographical landscape of Ambala)

अंबाला जिला हरियाणा प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। जिले का कुल क्षेत्रफल 1569 वर्ग कि.मी. है। हरियाणा के पंचकूला, कुरुक्षेत्र तथा यमुनानगर जिलों के साथ-साथ यह जिला पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश के साथ भी सीमाएँ साझा करता है।

जिले का अधिकतर भाग मैदानी है। अंबाला जिले के मैदानी क्षेत्र को सतलुज-गंगा के उपजाऊ मैदान का भाग माना जाता है। यहां अत्यधिक उपजाऊ दोमट मृदा मिलती है। जिले के उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक श्रृंखला का विस्तार मिलता है। इस क्षेत्र में पर्वतपादीय मृदा मिलती है। जिले के इस भाग में कई छोटे-छोटे बरसाती नाले हिमाचल की सिरमौर की पहाड़ियों से आकर गिरते हैं। इस मैदान का ढ़लान दक्षिण-पश्चिम

की ओर है। अंबाला जिले से टांगड़ी तथा मारकण्डा नदियों का प्रवाह है। मारकण्डा नदी में शिवालिक की पहाड़ियों से अनेकों बरसाती नाले आकर गिरते हैं। यही कारण है कि वर्षाकाल में यह नदी विकराल रूप धारण कर लेती है तथा जिले में बाढ़ का कारण बनती है। घग्गर नदी अंबाला जिले के पश्चिमी छोर तथा पौराणिक सरस्वती नदी जिले के पूर्वी छोर से होकर जाती है।

अंबाला में वर्षा तथा जलवायु (Rain and Climate in Ambala)

अंबाला जिले की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है। ग्रीष्म काल में जून के महीने में तापमान 47° से. तक चला जाता है। नवंबर से फरवरी तक अंबाला जिले में शीतकाल रहता है। जनवरी के आरंभ में गहरी धुंध होती है तथा रात का तापमान कम होकर 0.5° से. तक आ जाता है। जिले में अधिकतर वर्षा बंगाल की खाड़ी से उठने वाले दक्षिण-पूर्वी मानसून से होती है। अंबाला जिले की कुल औसत वार्षिक वर्षा की लगभग 80% वर्षा जुलाई से सितंबर माह के बीच होती है। अंबाला जिला हरियाणा प्रदेश का सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा वाला जिला है। जिले में वर्षा का वार्षिक औसत 75-100 से.मी. तक है। सर्दियों के समय पश्चिमी विक्षोभ भी कुछ वर्षा लाते हैं।

अंबाला में  कृषि तथा वन

अंबाला जिला हरियाणा के सबसे अधिक उपजाऊ जिलों में से एक है। गेहूँ, धान तथा गन्ना अंबाला जिले की प्रमुख फसलें हैं। इनके साथ-साथ अंबाला जिले में सूरजमुखी, गैंदा तथा गुलाब आदि फूलों की खेती की जाती है। जिले में खीरे, ककड़ी, घीया, तोरई, मूली, गाजर, टमाटर, आलू, प्याज आदि स्थानीय सब्जियों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। अंबाला जिले में आम, जामुन, अमरूद, केला आदि फल भी उगाए जाते हैं।

जिले में मुर्गीपालन तथा मछलीपालन में पिछले दो दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंबाला जिले में प्राकृतिक वन नहीं बचे हैं। परन्तु, नदियों-नहरों के किनारे, सड़कों तथा रेलमार्गो के साथ-साथ हरित पट्टियां विकसित की गई है।

अंबाला जिले का सामाजिक परिदृश्य (Social landscape of Ambala district)

अंबाला जिला हरियाणा के सर्वाधिक विकसित जिलों में से एक है। अंबाला जिले की कुल जनसंख्या 11,28,350 है। इनमें से 5,98,703 पुरुषों की संख्या तथा 5,29,647 महिलाओं की संख्या है। जिले का लिंगानुपात चिंतनीय स्थिति में है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में प्रति 1000 पुरुषों पर 885 महिलाएँ हैं। 6 वर्ष के कम आयुवर्ग में लिंगानुपात की स्थिति और भी चिन्ताजनक है। इस आयुवर्ग में जिले का लिंगानुपात 807 है। अंबाला जिले में साक्षरता की दर 81.7% है। जिले में पुरुषों की साक्षरता दर 87.3% तथा महिलाओं की साक्षरता दर 75.5% है। अंबाला जिले में जनसंख्या का घनत्व 717 है। जिले की 55.6% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है तथा कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। जिले की दशकीय वृद्धि दर 11.23 प्रतिशत रही है।

अंबाला शहर अंबाला मंडल का मुख्यालय भी है जिसमें चार जिले-अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र सम्मिलित हैं। अंबाला शहर में पुलिस और प्रशासन की दृष्टि से ‘कमिश्नरी व्यवस्था’ स्थापित की गई थी, परन्तु अब इसे समाप्त कर दिया गया है। अंबाला में अंबाला पुलिस रेंज का मुख्यालय भी है। इस रेंज में अंबाला, यमुनानगर तथा कुरुक्षेत्र जिले भी शामिल हैं। । स्थानीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए अंबाला नगर निगम बनाया गया है। अंबाला जिले में कुल 481 गांव हैं जिनमे 491 ग्राम पंचायत हैं। जिले में कुल 6 पंचायत समिति तथा 15 जिला परिषद् वार्ड हैं। संसदीय लोकतंत्र की दृष्टि से अंबाला जिला अंबाला संसदीय क्षेत्र (सुरक्षित) का भाग है। अंबाला जिले में चार विधानसभा क्षेत्र-अंबाला कैंट, अंबाला शहर, नारायण गढ़ तथा मुलाना (सुरक्षित) हैं।

अंबाला जिले का भौगोलिक परिदृश्य (Geographical landscape of Ambala district)

अंबाला जिला हरियाणा प्रदेश के उत्तरी भाग में स्थित है। जिले का कुल क्षेत्रफल 1569 वर्ग कि.मी. है। हरियाणा के पंचकूला, कुरुक्षेत्र तथा यमुनानगर जिलों के साथ-साथ यह जिला पंजाब तथा हिमाचल प्रदेश के साथ भी सीमाएँ साझा करता है।

जिले का अधिकतर भाग मैदानी है। अंबाला जिले के मैदानी क्षेत्र को सतलुज-गंगा के उपजाऊ मैदान का भाग माना जाता है। यहां अत्यधिक उपजाऊ दोमट मृदा मिलती है। जिले के उत्तर-पूर्वी भाग में शिवालिक श्रृंखला का विस्तार मिलता है। इस क्षेत्र में पर्वतपादीय मृदा मिलती है। जिले के इस भाग में कई छोटे-छोटे बरसाती नाले हिमाचल की सिरमौर की पहाड़ियों से आकर गिरते हैं। इस मैदान का ढ़लान दक्षिण-पश्चिम की ओर है। अंबाला जिले से टांगड़ी तथा मारकण्डा नदियों का प्रवाह है। मारकण्डा नदी में शिवालिक की पहाड़ियों से अनेकों बरसाती नाले आकर गिरते हैं। यही कारण है कि वर्षाकाल में यह नदी विकराल रूप धारण कर लेती है तथा जिले में बाढ़ का कारण बनती है। घग्गर नदी अंबाला जिले के पश्चिमी छोर तथा पौराणिक सरस्वती नदी जिले के पूर्वी छोर से होकर जाती है।

अंबाला जिले में वर्षा तथा जलवायु (Rain and climate in Ambala district)

अंबाला जिले की जलवायु महाद्वीपीय प्रकार की है। ग्रीष्म काल में जून के महीने में तापमान 47° से. तक चला जाता है। नवंबर से फरवरी तक अंबाला जिले में शीतकाल रहता है। जनवरी के आरंभ में गहरी धुंध होती है तथा रात का तापमान कम होकर 0.5° से. तक आ जाता है। जिले में अधिकतर वर्षा बंगाल की खाड़ी से उठने वाले दक्षिण-पूर्वी मानसून से होती है। अंबाला जिले की कुल औसत वार्षिक वर्षा की लगभग 80% वर्षा जुलाई से सितंबर माह के बीच होती है। अंबाला जिला हरियाणा प्रदेश का सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा वाला जिला है। जिले में वर्षा का वार्षिक औसत 75-100 से.मी. तक है। सर्दियों के समय पश्चिमी विक्षोभ भी कुछ वर्षा लाते हैं।

अंबाला जिले में कृषि तथा वन (Agriculture and Forests in Ambala District)

अंबाला जिला हरियाणा के सबसे अधिक उपजाऊ जिलों में से एक है। गेहूँ, धान तथा गन्ना अंबाला जिले की प्रमुख फसलें हैं। इनके साथ-साथ अंबाला जिले में सूरजमुखी, गैंदा तथा गुलाब आदि फूलों की खेती की जाती है। जिले में खीरे, ककड़ी, घीया, तोरई, मूली, गाजर, टमाटर, आलू, प्याज आदि स्थानीय सब्जियों का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। अंबाला जिले में आम, जामुन, अमरूद, केला आदि फल भी उगाए जाते हैं। जिले में मुर्गीपालन तथा मछलीपालन में पिछले दो दशक में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंबाला जिले में प्राकृतिक वन नहीं बचे हैं। परन्तु, नदियों-नहरों के किनारे, सड़कों तथा रेलमार्गो के साथ-साथ हरित पट्टियां विकसित की गई है।

अंबाला जिले का सामाजिक परिदृश्य (Social landscape of Ambala district)

अंबाला जिला हरियाणा के सर्वाधिक विकसित जिलों में से एक है। अंबाला जिले की कुल जनसंख्या 11,28,350 है। इनमें से 5,98,703 पुरुषों की संख्या तथा 5,29,647 महिलाओं की संख्या है। जिले का लिंगानुपात चिंतनीय स्थिति में है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में प्रति 1000 पुरुषों पर 885 महिलाएँ हैं। 6 वर्ष के कम आयुवर्ग में लिंगानुपात की स्थिति और भी चिन्ताजनक है। इस आयुवर्ग में जिले का लिंगानुपात 807 है। अंबाला जिले में साक्षरता की दर 81.7% है। जिले में पुरुषों की साक्षरता दर 87.3% तथा महिलाओं की साक्षरता दर 75.5% है। अंबाला जिले में जनसंख्या का घनत्व 717 है। जिले की 55.6% जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है तथा कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। जिले की दशकीय वृद्धि दर 11.23 प्रतिशत रही है।

अंबाला जिले की परिवहन व्यवस्था (Transport system of Ambala district)

अंबाला जिले की परिवहन व्यवस्था बड़ी विकसित अवस्था में हैं। अंबाला छावनी राष्टीय राजमार्ग संख्या-1 पर स्थित है। इसके अतिरिक्त राष्टीय राजमार्ग संख्या 22,65 और 73 भी अंबाला को विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ते हैं। अंबाला शहर सड़क मार्ग द्वारा चण्डीगढ़, पटियाला, कैथल, यमुनानगर, पंचकूला आदि बड़े शहरों के साथ जुड़ा हुआ है।

अंबाला ज. उत्तर रेलवे का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है। अंबाला छावनी जं. अंबाला को विद्युतीकृत रेलमार्ग के द्वारा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तथा अमृतसर से जोड़ता है। अंबाला कैंट को चण्डीगढ़, कालका तथा शिमला के साथ रेलमार्ग से जोड़ा गया है। इसके साथ-साथ अंबाला को. जगाधरी और सहारनपुर के रास्ते. देहरादून से भी जोड़ा गया है। अंबाला में भारतीय वायुसेना का एयरफोर्स बेस (हवाई अड्डा) बना हुआ है।

अंबाला जिले का आर्थिक परिदृश्य (Economic scenario of Ambala district)

अंबाला जिले का आर्थिक परिदृश्य गेहूं और चावल अबाला की प्रमुख रबी और खरीफ की फसलें हैं। इसके अतिरिक्त गन्ना, तिलहन, आम, आलू, प्याज, और कई प्रकार की सब्जियाँ भी इस क्षेत्र में उगाई जाती हैं। सिलाई मशीन और मिक्सी उद्योग के कारण देश में अंबाला का विशिष्ट स्थान है। यहाँ पर अंग्रेजों के समय से वैज्ञानिक उपकरण बनाने के उद्योग स्थापित हैं। अंबाला जिले की लघु इकाइयों के बल पर देश के वैज्ञानिक उपकरणों के निर्यात में 20% हिस्सा अकेले अंबाला जिले का है। दूसरे विश्वयुद्ध के पूर्व से ही यहाँ का शीशा उद्योग देशभर में प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त गैस स्टोव, हस्तनिर्मित दरियाँ और इंजिनियरिंग संबंधी उपकरणों का यहाँ बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। नारायणगढ़ के बनौदी में मै. नारायण गिढ़ शुगर मिल्स है जिसकी स्थापना 1996-97 में हुई थी। इस शुगर मिल में व्हाइट क्रिस्टल शुगर का उत्पादन होता है। भगवती राइस मिल्स, धुरकड़ा और न्यू हरियाणा राइस मिल्स, अंबाला इस जिले की प्रमुख चावल मिल हैं।

औद्योगिक विकास केंद्र , साहा-बावल के औद्योगिक विकास केंद्र की सफलता से प्रेरित होकर एच. एस. आई. आई. डी. सी. (HSIIDC) द्वारा अंबाला जिले के साहा में भी 1000 एकड़ में एक औद्योगिक विकास केंद्र स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। इसके साथ-साथ साहा में एच.एस.आई.आई.डी.सी. द्वारा 70 एकड़ क्षेत्र में एक ‘फूड पार्क’ भी विकसित किया गया है। इस फूड पार्क में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करने के लिए कुल 149 औद्योगिक प्लॉट हैं।

अंबाला जिले के शिक्षण संस्थान (Educational institutes of Ambala district)

अंबाला जिला हरियाणा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण जिलों में से एक है। इस जिले का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि खुद हरियाणा का इतिहास है। हरियाणा गठन के समय 1966 में अंबाला पंजाब के विकसित जिलों में से एक था। 1966 ई. में जिले में बच्चों की शिक्षा के लिए 99 माध्यमिक विद्यालय और 86 उच्च तथा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय स्थापित थे। 1927 में रोहतक में इंटरमिडिएट तक की शिक्षा व्यवस्था के साथ प्रदेश में पहला सरकारी कॉलेज स्थापित हुआ। परन्तु बी.ए. तक की पूर्ण कक्षाओं वाला हरियाणा का पहला कॉलेज 1938 में स्थापित अंबाला का एस.ए.जैन कॉलेज था। इसके पश्चात् 1966 तक आते-आते जिले में कुल 9 महाविद्यालय स्थापित हो चुके थे।

अंबाला का सनातन धर्म महाविद्यालय (एस.डी. कॉलेज) वास्तविक रूप से 1916 ई. में लाहौर में स्थापित हुआ था। विभाजन के उपरान्त यह महाविद्यालय 3 अक्तूबर, 1951 के उपरान्त अंबाला में पुनर्स्थापित किया गया। इस महाविद्यालय का शिलान्यास भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा किया गया था। भाजपा नेत्री तथा केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज इस महाविद्यालय की छात्रा रह चुकी हैं। वर्तमान में जिले में अनेकों प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान स्थापित हो चुके हैं।

महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय अंबाला (Maharishi Markandeshwar University Ambala)

मुलाना-अंबाला जिले के. मुलाना में स्थित महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय हरियाणा का प्रथम निजी क्षेत्र का विश्वविद्यालय है। यह विश्वविद्यालय प्रारंभ में महर्षि मारकंडेश्वर एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा एक अभियांत्रिकी महाविद्यालय के रूप में स्थापित किया गया था। इस ट्रस्ट की स्थापना 1993 में समाजसेवी तरसेम गर्ग द्वारा की गई थी। 2007 में इस संस्थान को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया। यह विश्वविद्यालय जिले का एकमात्र विश्वविद्यालय है। इस ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2003 में मुलाना में महर्षि मारकंडेश्वर आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई। यह प्रदेश का दूसरा निजी क्षेत्र का (प्रथम गैर-सहायता प्राप्त) मेडिकल कॉलेज है।

जवाहर नवोदय विद्यालय, कौला (अंबाला) (Jawahar Navodaya Vidyalaya, Kaula – Ambala)

1986 की नई शिक्षा नीति के अनुसार पूरे देश में नवोदय विद्यालयों की स्थापना की गई। अंबाला जिले के कौलां गांव में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना 2007 में की गई। जिले के प्रमुख मेले – तीज का मेला-यह मेला अंबाला जिले के पंजोखड़ा नामक स्थान पर सावन में शुक्लपक्ष तृतीया को आयोजित होता है। . बावन द्वादशी का मेला-यह मेला अंबाला जिले में भादों माह में द्वादशी के दिन लगता है। . शारदा देवी का मेला-इस मेले का आयोजन चैत्र माह में अंबाला जिले के त्रिलोकपुर में किया जाता है। . गुरु नानक दिवस-गुरु नानक जी की जयंती के अवसर पर अंबाला में यह मेला लगता है। . गूगा नवमी का मेला-यह मेला गूगानवमी के अवसर पर अंबाला जिले के केसरी नामक गाँव में लगता है।

अम्बाला जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थान (Major Attractions in Ambala District)

किंग फिशर-दिल्ली-अंबाला-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 1 पर स्थित किंग फिशर एक सुन्दर और आकर्षक पर्यटन स्थल है। किसी समय यह ब्रिटिश साम्राज्य की घुड़साल होता था। इसे हरियाणा सरकार ने एक भव्य पिकनिक स्थल के रूप में विकसिंत किया है।

अम्बाला में मंदिर, गुरुद्वारे तथा चर्च (Temples, gurudwaras and churches in Ambala)

गुरुद्वारा लखनौर साहिब-लखनौर या लखनौती गाँव को गुरु गोविन्द सिंह जी का ननिहाल होने का गौरव प्राप्त है। लखनौर साहिब गुरुद्वारा सिखों का एक महत्वपूर्ण आस्था स्थल है। अंबिका देवी मंदिर-अंबाला शहर का यह अंबिका देवी का मंदिर महाभारत के काल का बना हुआ बताया जाता है। सेंट पॉल चर्च-यह चर्च 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय क्षतिग्रस्त हो गया। इस चर्च का निर्माण 1857 में हुआ था।

अम्बाला में राज्य स्तरीय शहीद स्मारक (State level martyr memorial in Ambala)

हरियाणा सरकार द्वारा 1857 की क्रान्ति और प्रदेश के शहीदों की याद में अंबाला में 22 एकड़ क्षेत्र में 220 करोड़ की लागत से एक शहीद स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। 1857 की क्रांति 10 मई, 1857 को मेरठ के साथ-साथ अंबाला छावनी में भी आरंभ हो गई थी। इसलिए 1857 की क्रान्ति में अंबाला का विशेष योगदान माना जाता है। अंबाला के योगदान को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह शहीद स्मारक बनाया जा रहा है। यहां पर एक स्मारक स्तम्भ, पुस्तकालय, रंगशाला के अलावा एक ‘ओपन एयर थियेटर’ भी बनाया जाएगा। इसके साथ-साथ पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां एक हेलीपैड और फूड पार्क भी बनाए जाएंगे।

 

 

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