अजीत सिंह – लाडवा नरेश

1763 ई. में लाडवा रियासत की नींव सरदारसिंह ने डाली थी। 19वीं सदी के आरंभ में रियासत पर राजा गुरुदत्तसिह का शासन था। वह अंग्रेजों से बेहद घणा करते थे। गुरुदत्तसिंह के उत्तराधिकारी के रूप में राजा अजीतसिंह ने लाडवा रियासत का शासन संभाला। महाराज अजीत सिंह भी अपने पिता की भांति अंग्रेजों से नफरत करते थे। थानेसर में सरस्वती नदी पर एक पुल का निर्माण भी उनके द्वारा करवाया गया बताया जाता है। 1845 ई. में अंग्रेजों ने राजा अजीत सिंह को विद्रोही घोषित करके उसे सहारनपुर में नजरबंद कर दिया। प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-46) के दौरान लाडवा नरेश अजीत सिंह इस निगरानी से फरार हो गए। जनवरी, 1846 में उन्होंने अंग्रेजों की लुधियाना छावनी को नष्ट कर डाला। 21 जनवरी, 1846 ई. को उन्होंने रणजोड़ सिंह के साथ मिलकर हेनरी स्मिथ के नेतृत्व में लड़ रही अंग्रेज सेना को बंदी बना लिया। परन्तु, 28 जनवरी, 1846 को अलीवाल में उसे हार का सामना करना पड़ा और अन्त में वह अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए।

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