हड़प्पा सभ्यता का सामाजिक जीवन

स्त्री मृणमूर्तियां अधिक मिलने से ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि सैन्धव समाज मातृसत्तात्मक था। इस सभ्यता के लोग युद्ध प्रिय कम, शान्तिप्रिय अधिक थे।

भोजन के रूप में सैन्धव सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, खजूर एवं भेड़, सुअर, मछली के मांस को खाते थे। घर में बर्तन के रूप में मिट्टी एवं धातु के बने कलश, थाली, कटोरे, तश्तरी, गिलास एवं चम्मच प्रयोग करते थे। वस्त्र के रूप में सूती एवं ऊनी दोनों प्रकार के वस्त्र प्रयोग होने के साक्ष्य मिले हैं।

पुरुष वर्ग दाढ़ी एवं मूंछों का शौकीन था। खुदाई के समय तांबे के निर्मित दर्पण, कंघे एवं उस्तरे मिले हैं। आभूषणों में कण्ठहार, भुजबन्ध, कर्ण फूल, छल्ले, चूड़ियाँ (कालीबंगा से प्राप्त), करधनी, पाजेब आदि ऐसे आभूषण मिले हैं, जिन्हें स्त्री और पुरुष पहनते थे। मनोरंजन के साधनों में मछली पकड़ना, शिकार करना, पशु-पक्षियों को आपस में लड़ाना, चौपड़, पासा खेलना आदि शामिल थे।

शवों की अन्त्येष्टि संस्कार में तीन प्रकार के शवोत्सर्ग के प्रमाण मिले हैं-1. पूर्ण समाधिकरण में सम्पूर्ण शव को भूमि में दफना दिया जाता था। 2. आंशिक समाधिकरण में पशु पक्षियों के खाने के बाद बचे शेष भाग को भूमि में दफना दिया जाता था। 3. दाह संस्कार में शव को पूर्ण रूप से जला कर उसकी भस्म को भूमि में गाड़ा जाता था। हड़प्पा दुर्ग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित कब्रिस्तान को एच0 (h) कब्रिस्तान का नाम दिया गया है। लोथल में प्राप्त एक कब्र में शव का सिर पूर्व एवं पैर पश्चिम की ओर एवं शव का शरीर करवट लिये हुए लिटाया गया है। यहीं से एक कब्र में दो शव आपस में लिपटे हए मिले हैं। सुरकोतड़ा से अंडाकार शव के अवशेष मिले हैं। रूपनगर की एक कब्र में मालिक के साथ कुत्ते के भी अवशेष मिले हैं। मोहन जोदड़ो के अन्तिम स्तर से प्राप्त कुछ सामूहिक नर कंकालों एवं कुएँ की सीढ़ियों पर पड़े स्त्री के बाल से यह अनुमान लगाया जाता है कि किसी विदेशी आक्रमण से इस नगर का पतन हुआ।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *