हरियाणा की वेशभूषा एवं खानपान

हरियाणा की संस्कृति जितनी सप्तरंगी है उतनी ही सादी गाँव-देहात के लोगों की वेशभूषा और खान-पान है। केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली और चण्डीगढ़ के अलावा हरियाणा की सीमाएँ मुख्य रूप से पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश से लगती हैं। उत्तरी हरियाणा में लोक जीवन पर पंजाब की संस्कृति का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है तो दक्षिणी हरियाणा के ग्राम्य जीवन पर राजस्थानी संस्कृति की छाप देखी जा सकती है। पंचकूला से लेकर नारनौल तक, सिरसा से लेकर पलवल तक हरियाणवी संस्कृति में विभिन्न प्रकार छटाएं देखने को मिलती हैं।

हरियाणा की पारंपरिक वेशभूषा खादी थी। पुरुष तथा महिलाएँ दोनों ही सिर को ढक कर रखते थे। पुरुष धोती, कुर्ता पहनते थे तथा महिलाएँ घाघरा, कुर्ती पहनती थीं। प्रदेश की लोकभूषा की एक झलक यहाँ प्रस्तुत की गई है।

प्रदेश में पुरुषों की पारंपरिक वेशभूषा

धोती 

पुरुषों द्वारा पैरों को ढांपने के लिए बांधी जाती है।

कुर्ता

कुर्ता एक प्रकार की बिना कॉलर की कमीज होती है जिसका अगला भाग केवल गले के पास से खुला होता है।

साफा

सैनिकों जैसी पगडी।

खण्डवा

पगड़ी।

पाग

परंपरागत राजपूत शैली की पगड़ी

कमरी

सूती कपड़े से बनी, बिना बाजू के बनियान जैसा वस्त्र जिसे कुर्ते के नीचे पहना जाता है।

खेस

देसी सूत से बनी चादर, जिसे सर्दियों से बचने के लिए ओढ़ा जाता है।

लोई

ऊन से बनी ओढ़ने वाली चादर

मिरजई

रूई भरकर बनाई गई कमरी |

गुलीबन्द

मफलर

 

स्त्रियों द्वारा पहनी जाने वाली पारंपरिक वेशभूषा

  • जंफर- महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली कमीज

 

  • ओढणी-गोट-गोटा लगी चुन्नी

 

  • दामण-सूती कपड़े का घाघरा कुर्ता-दामण के साथ कुर्ता पहना जाता है। यह एक प्रकार की कमीज होती है जिसमें गले के भाग पर बटन लगे होते हैं।

 

  • आंग्गी-अंगिया.

 

  • फरगल-यह एक प्रकार का लंबा टोप होता है जिसे विशेषत: बच्चों को पहनाया जाता है। फरगल में लगी रंग-बिरंगी झालरें कमर तक लटकती हैं।

 

  • चूंदड़ी/चूंदणी-रंगाई वाली पतली ओढ़नी विशेषकर, जिसके पल्ले लाल रंग से रंगे होते हैं।

 

  • पीलिया-हरियाणा में पीले रंग को शुभ माना जाता है। बच्चे के जन्म के अवसर पर पीले रंग से रंगाई हुई ओढ़नी जिसके किनारों पर लाल रंग की रंगाई की होती है, माँ के पीहर की ओर से भेजी जाती है जिसे पीलिया कहते हैं। इसे ओढ़कर महिलाएँ कुआँ पूजन करती हैं।

 

  • ओढणा-गोट-गोटा से सजी चुन्नी (ओढणी)

 

  • कैरी-नीले खद्दर पर लाल टीकों वाले कपड़े का घाघरा

 

  • छयामा-पीले पाट की मनमोहक कढ़ाई वाली ओढ़नी (चुन्नी)

 

  • बोरड़ा-खद्दर के कपड़े का घाघरा जिस पर फूल पत्तियों की छपाई होती है।

 

  • दूकानियां सर्दियों में ओढने के लिए लाल रंग से रंगे खद्दर का ओढ़ना जिस पर पीले रंग से कढ़ाई की होती है। प्रदेश के कछ भागों में इसे दूबला भी कहा जाता है।

 

  • लैह-नीले सूती कपड़े पर पीले पाट की कढ़ाई वाले कपड़े का घाघरा।

 

  • सोपली-गहरे लाल रंग की ओढ़नी जिसके किनारों पर छपाई की होती है।

 

  • गुमटी-रंगीन सूती कपड़े पर रेशमी बूदियों वाली कढ़ाईदार ओढ़नी।

 

  • लहरिया-यह एक प्रकार की बंधेज (बंधाई पद्धति) की चुन्दड़ी होती है।

 

  • कंघ-पक्के लाल रंग की ओढ़नी जिस पर कई तरह की कढ़ाई की जाती है। बेल, पेड़-पौधे तथा फिर्कीदार कढ़ाई से इसे आकर्षक बनाया जाता है।

 

  •  फुलकारी-कंघ पर ऊन से कढ़ाई करके फुलकारी बनाई जाती है।

 

  • झुगला-नवजात शिशुओं तथा छोटे बच्चों को पहनाए जाने वाले कपड़े।

शयनकक्ष के वस्त्र

  • गदेला-रूई से बना खद्दर का गद्दा जिसे चारपाई पर बिछाया जाता है।

 

  • बिछौना-कपड़े से बना गदेला, इसमें कपड़े के खोल के अन्दर पुराने कपड़े इत्यादि भरे जाते हैं।

 

  • सौड़-खद्दर की रजाई।

 

  • गिंडवा-तकिया।

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