सिंधु घाटी अथवा हड़प्पा सभ्यता का विस्तार

अब तक इस सभ्यता के अवशेष पाकिस्तान और भारत के पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के भागों में पाये जा चुके हैं। इस सभ्यता का फैलाव उत्तर में जम्मू के मांदा से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने भगतराव तक और पश्चिम में मकरान समुद्र तट पर सुतकागेनडोर से लेकर पूर्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ तक है। इस सभ्यता का सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल सुत्कागेनडोर, पूर्वी पुरास्थल आलमगीरपुर, उत्तरी पुरास्थल माँदा तथा दक्षिण पुरास्थल दैमाबाद है। लगभग त्रिभुजाकार वाला यह भाग कुल करीब 12,99600 वर्ग कि0 मी0 के क्षेत्र में फैला हुआ है। सिन्धु सभ्यता का विस्तार पूर्व पश्चिम तक 1600 कि0 मी0 तथा उत्तर से दक्षिण तक 1100 कि0 मी0 था। इस प्रकार सिंधु सभ्यता समकालीन मिस्त्र या सुमेरियन सभ्यता से अधिक विस्तृत क्षेत्र में फैली थी।

सिंधु सभ्यता के स्थल अब निम्नलिखित क्षेत्रों में मिलते हैं—

बलूचिस्तान-उत्तरी बलुचिस्तान में स्थित क्वेटा तथा जाँब की धारियों में सैंधव सभ्यता से सम्वन्धित कोई भी स्थल नहीं है। किन्तु दक्षिणी बलूचिस्तान में सैंधव सभ्यता के कई पुरास्थल स्थित हैं जिसमें अति महत्वपूर्ण है मकरान तट। मकरान तट प्रदेश पर मिलने वाले अनेक स्थलों में से पुरातात्विक दृष्टि से केवल तीन स्थल महत्वपूर्ण हैं-सुतकांगेडोर (दाश्क नदी के मुहाने पर), सोतकाकोह (शादी कौर के मुहाने पर) और बालाकोट, डाबर कोट (सोन मियानी खाड़ी के पूर्व में विदर नदी के मुहाने पर)।

उत्तर पश्चिमी सीमांत—यहाँ सारी सामग्री, गोमल घाटी में केन्द्रित प्रतीत होती है जो अफगानिस्तान जाने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। गुमला जैसे स्थलों पर सिंधु पूर्व सभ्यता के निक्षेपों के ऊपर सिंधु सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

सिंधु–इनमें कुछ स्थल प्रसिद्ध हैं जैसे मोहनजोदड़ो, चन्हूदड़ो, जूडेरजोदड़ो, (कच्छी मैदान में जो कि सीबी और जैकोबाबाद के बीच सिंधु की बाढ़ की मिट्टी का विस्तार है) अमरी (जिसमें सिंधु पूर्व सभ्यता के निक्षेप के ऊपर सिंधु सभ्यता के निक्षेप मिलते हैं) कोटदीजी, अलीमुराद, रहमानदेरी, राणाधुंडई इत्यादि । 

पश्चिमी पंजाब—इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा स्थल नहीं हैं। इसका कारण समझ में नहीं आता। हो सकता है पंजाब की नदियों ने अपना मार्ग बदलते-2 कुछ स्थलों को नष्ट कर दिया हो। इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्थल हड़प्पा है जो रावी में सूखे हुए मार्ग पर स्थित है। इसके अतिरिक्त डेरा इस्माइल खान, जलीलपुर, रहमानढेरी, गुमला, चक-पुरवानेस्याल आदि महत्वपूर्ण पुरास्थल है।

बहावलपुर–यहाँ के स्थल सूखी हुई सरस्वती नदी के मार्ग पर स्थित हैं। इस मार्ग का स्थानीय नाम ‘हकरा’ है। घग्घर हकरा अर्थात् सरस्वती दृशद्वती नदियों

की घाटियों में हड़प्पा संस्कृति के स्थलों का सर्वाधिक संकेन्द्रण (सर्वाधिक स्थल) प्राप्त हआ है। किन्तु इस क्षेत्र में अभी तक किसी स्थल का उत्खनन नहीं हुआ है। इस स्थल का नाम कुडवाला थेर है जो प्रकटत: बहुत बड़ा है।

राजस्थान

यहाँ के स्थल बहावलपुर के स्थलों के निरंतर क्रम में हैं जो प्राचीन सरस्वती नदी के सूखे हुए मार्ग पर स्थित हैं। इस क्षेत्र में सरस्वती नदी को घध्यर कहा जाता है। कुछ स्थल प्राचीन दृषद्वती नदी के सूखे हुए मार्ग के साथ-साथ भी है जिसे अब (चौतांग नदी कहा जाता है)। इस क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्थल कालीबंगा है। कालीबंगा नामक पुगस्थल पर भी पश्चितम में गढ़ी और पूर्व में नगर के दो टीले, हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ों की भाँति विद्यमान है। राजस्थान के समस्त सिंधु सभ्यता के स्थल आधुनिक गंगानगर जिले में आते हैं।

हरियाणा

हरियाणा का महत्वपूर्ण सिंधु सभ्यता स्थल हिसार जिले में स्थित बनवाली है। इसके अतिरिक्त मिथातल, सिसवल, वणावली, राखीगढ़, बाड़ा तथा बालू नामक स्थलों का भी उत्खनन किया जा चुका है।

पूर्वी पंजाब

इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थल रोपड़ संघोल है। हाल ही में चंडीगढ़ नगर में भी हड़प्पा संस्कृति के निक्षेप पाये गये हैं। इसके अतिरिक्त कोटलानिहंग खान, चक 86, वाड़ा, ढेर-मजरा आदि पुरास्थलों से सैंधव सभ्यता से सम्बद्ध पुरावशेष प्राप्त हुए है।

गंगा-यमुना दोआब 

यहाँ के स्थल मेरठ जिले के आलमगीर तक फैले हुए हैं। एक अन्य ग्थल सहारनपुर जिले में स्थित हुलास तथा बड़गाँव है | हुलास तथा बड़गाँव की गणना पश्वर्ती सिन्धु सम्यता के पुरास्थलों में की जाती है।

जम्मू

इस क्षेत्र के मात्र एक स्थल का पता लगा है, जो अखनूर के निकट मॉडा में है। यह ग्थल भी सिन्धु सभ्यता के परवर्ती चरण से सम्बन्धित है। 

  • हड़प्पा सभ्यता का सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल- सुत्कागेन्डोर (बलूचिस्तान) 
  • सर्वाधिक पूर्वी पुगग्थल-आलमगीरपुर (मेरठ) 
  •  मर्वाधिक उत्तर पूगग्थल—माँडा (जम्मू-काश्मीर) 
  •  सर्वाधिक दक्षिणी पुगग्थल-दायमावाद (महाराष्ट्र)

गुजरात

1947 के बाद गुजरात में सेंधव स्थलों की खोज के लिए व्यापक म्तर पर उत्खनन किया गया। गुजरात के कच्छ, सौराष्ट्र तथा गुजरात के मैदानी भागों में मैंधव सभ्यता से सम्बन्धित 22 पुरास्थल है, जिसमें से 14 कच्छ क्षेत्र में तथा शेष अन्य भागों में स्थित है। गुजरात प्रदेश में ये पाए गए प्रमुख पुरास्थलों में रंगपुर, लोथल, प्रभास-पाटन, रोझदी, देशलपुर, मेधम, वेलोद, भगवतराव, सुरकोटदा, नागेश्वर, कुन्तामी, शिकारपुर तथा धौलावीरा आदि है। महाराष्ट्र प्रदेश के दैमावाद नामक पुरास्थल में मिट्टी के कुछ ठिको प्राप्त हुए है जिन पर चिरपरिचित सैंधव लिपि में कुछ लिखा मिला है, किन्तु पर्याप्त माक्ष्य के अभाव में मैंधव सभ्यता का विस्तार महाराष्ट्र तक नहीं माना जा सकता है। ताम्र मूर्तियों का एक निधान, जिसे प्रायः हड़प्पा संस्कृति से सम्बद्ध किया जाता है, वह महाराष्ट्र के दायमावाद नामक स्थान से प्राप्त हुआ है- इसमें रथ चलाते मनुष्य, मांड, गैंडा और हाथी की आकृति प्रमुख है। यह सभी ठोस धातु की है आप वजन कई किलो है, इसकी तिथि के विषय में विद्वानों में मतभेद है।

अफगानिस्तान

हिन्दुकुश के उत्तर में अफगानिस्तान में स्थित मुडीगाक और मार्तगाई दो पुगग्थल है। मुंडीगाक का उत्खनन जे0 एम0 कैसल द्वारा गया गया था तथा मातंगाई की खोज एवं उत्खनन हेनरी फ्रैंकफर्ट द्वारा कराया गया था। सातगोई लाजवर्द की प्राप्ति के लिए बसाई गई व्यापारिक बस्ती थी। 

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