ऋग्वैदिक काल 1500-1000 ई0 पू0

स्रोत -ऋग्वैदिक काल के अध्ययन के लिए दो प्रकार के साक्ष्य उपलब्ध हैं

पुरातात्विक साक्ष्य—

इसके अर्न्तगत निम्नलिखित साक्ष्य प्राप्त हुए हैं-

चित्रित धूसर मृदभाण्ड

खुदाई में हरियाणा के पास भगवानपुर में मिले 13 कमरों वाला मकान तथा पंजाब में भी प्राप्त तीन ऐसे स्थल जिनका सम्बन्ध ऋग्वैदिक काल से जोड़ा जाता है।

बोगाजकोई अभिलेख/मितन्वी अभिलेख (1400 ई0 पू0)—इस लेख में हित्ती राजा शुब्बिलिम्मा और मित्तान्नी राजा मतिउआजा के मध्य हुई संधि के साक्षी के रूप में वैदिक देवता इन्द्र, मित्र, वरुण और नासत्य का उल्लेख है।

कस्सी अभिलेख (1600 ई0 पू0)-इस अभिलेख से यह ज्ञात होता है कि ईरानी आर्यों की एक शाखा भारत में आयी थी। 

साहित्यिक साक्ष्य-ऋग्वेद में 10 मण्डल एवं 1028 सुक्त हैं। पहला एवं दसवाँ मण्डल बाद में जोड़ा गया है जबकि दूसरा से 7वाँ मण्डल पुराना है। 

आर्यों का आगमन काल

आर्यों के आगमन के विषय में विद्वानों में मतभेद है। विक्टरनित्ज ने आर्यों के आगमन की तिथि 2500 ई0 निर्धारित की है जबकि बालगंगाधर तिलक ने इसकी तिथि 6000 ई0 पू0 निर्धारित की है। मैक्समूलर के अनुसार इनके आगमन की तिथि 1500 ई0 पू0 है। वर्तमान समय में मैक्समूलर का मत ही स्वीकार है। 

आर्यों का मूल स्थान

1. डॉ0 अविनाश चन्द्र दास ने अपनी पुस्तक ‘Rigvadic India’ में भारत में सप्त सैंधव प्रदेश को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

2. महामहोपाध्याय पं0 गंगानाथ झा ने भारत में ब्रह्मर्षि देश को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

3. डॉ0 राजबली पाण्डेय ने भारत में मध्य देश को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

4. एल0 डी0 कल्ला ने भारत में कश्मीर अथवा हिमालय प्रदेश आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

5. श्री डी0 एस0 त्रिदेव ने भारत में देविका प्रदेश (मुल्तान में) आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

6. स्वामी दयानन्द सरस्वती ने तिब्बत को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है। यह वर्णन इनकी पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ एवं ‘इंडियन हिस्टोरिकल ट्रेडिशन’ में मिलता है।

7. मैक्स मूलर और जे0 जी0 रीड ने मध्य एशिया में बैक्ट्रिया को आर्यों का मूल निवास स्थल बताया। मैक्स मूलर ने इसका उल्लेख ‘लेक्चर्स आन द साइंस आफ लैंग्युएजेज’ में किया है।

8. बाल गंगाधर तिलक ने उत्तरी ध्रुव को आर्यों का मूल निवास माना है। यह वर्णन इनकी पुस्तक “The Arctic Home of the Aryans” में मिलता है।

9. गाइल्स ने यूरोप में डेन्यूब नदी की घाटी एवं हंगरी को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है। 

10. पेन्का ने जर्मनी को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

11. एडवर्ड मेयर, ओल्डेनवर्ग, कीथ ने मध्य एशिया के पामीर क्षेत्र को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

12. नेहरिंग एवं प्रो0 गार्डन चाइल्स पोकार्नी ने दक्षिणी रूस को आर्यों का मूल निवास स्थान माना है।

आर्यों के मूल निवास के संदर्भ में सर्वाधिक प्रामाणिक मत आल्प्स पर्वत के पूर्वी भाग में स्थित यूरेशिया का है।

आर्यों के आदि स्थल 

आदि (मूल) स्थलमत
सप्तसैंधव क्षेत्रडॉ0 अविनाश चंद्रडॉ0 संपूर्णानन्द
ब्रह्मर्षि देशपं0 गंगानाथ झा
मध्य देशडॉ0 राजबली पाण्डेय
कश्मीरएल0 डी0 कल्ल
देविका प्रदेश (मुल्तान)डी0 एस0 त्रिदेव
उत्तरी ध्रुव प्रदेशबाल गंगाधर तिलक
हंगरी (यूरोप) (डेन्यूब नदी की घाटी)प्रो० गाइल्स
दक्षिणी रूसमेयर, पीक व गार्डन चाइल्ड्स
जर्मनीपेनका, हर्ट
यूरोपफिलिप्पो सेसेटी, सर विलियम जोन्स
पामीर एवं बैक्ट्रियामेयर एवं रेहर्ड
मध्य एशियाप्रो0 मैक्समूलर
तिब्बतदयानन्द सरस्वती, पार्जिट
हिमालय (मानस)डॉ0 के0 के शर्मा

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